जब मैंने ब्लॉग के बारे में सुना था तो बहुत ही चकित हुआ था.
तब बरसों पहले मेरे मन में यही सवाल कौंधा था कि क्या यह संभव है कि नेट पर कोई हिंदी में भी लिख सकता है !?
अब जान सका हूँ कि यह सत्य ही है और बहुत लोग लिख रहे हैं पर एक उचित मार्गदर्शक का अभाव मुझे महसूस हुआ था, जो मुझे यह बता पाता कि कैसे ब्लॉग लिखा जाता है और कहाँ पर लिखा जाता है ,
अतः मैंने सोचा कि इससे अच्छा विषय क्या होगा.
इसी कारण इस ब्लॉग " ब्लॉग्स पंडित " का जन्म हुआ.
यदि इसी विषय पर लिखता हूँ तो मेरी दो इच्छाएं पूरी हो जाएँगी --
1. मैं उन लोगों की सहायता कर सकूंगा जो ब्लाग लिखने के इच्छुक हैं.
2. मैं मेरी मातृभाषा की सेवा भी कर सकूंगा.
मेरी यह दिली-इच्छा है कि हिंदी विश्व भाषा के पद पर प्रतिष्ठित हो जाये.
मैं आप को बताऊंगा कि ब्लॉग लिखने में आने वाली समस्याओं से कैसे निपटा जाए.
किस प्रकार से लिखकर आप ख़ुद को संतुष्ट कर पाएंगे और कैसे पाठकों को अपने छोटे और प्यारे से चिट्ठे की ओर आकर्षित कर सकेंगे.
सिर्फ़ इतना ही नहीं आप जानेंगे कि ब्लॉगिंग से आय भी हो सकती है !!!
मैं बताऊंगा कि कैसे और कितने तरीके हैं ब्लॉग से रुपये कमाने के.
बस आप मेरे अगले लेख पढ़ते जाइए क्योंकि सब कुछ तो न मैं ही एक साथ बता पाऊंगा और न ही आप सब एक साथ समझ पायेंगे.
यह ब्लॉग मुख्यतः एक ' Money-Making ' Internet के जरिये पैसा बनाना सिखाने वाला blog है, जो आपको पहले ब्लॉग बनाना और फ़िर ब्लॉग सजाना और फ़िर ब्लॉग से पैसे कमाना सिखायेगा.
आप अपनी ब्लॉग बनाने में होने वाली समस्याओं पर प्रश्न पूछ सकते हैं.
आप का
ई-गुरु राजीव
1. मैं उन लोगों की सहायता कर सकूंगा जो ब्लाग लिखने के इच्छुक हैं.
ReplyDelete2. मैं मेरी मातृभाषा की सेवा भी कर सकूंगा.
दोनों इच्छाये पूरी हो रही हैं. लगे रहो!!
इंटरनेट आय इस महीने कम है. मंदी का असर यहां भी दिख रहा है!
सस्नेह -- शास्त्री
बहुत बढीया उद्देसय है। औ आपका यब बढीया और मदद करने वाला उद्देशय ज्लदी पूरा हो जाए।
ReplyDeleteई-गूरू जी, आपके लीखने का अंदाज बहुत जबर्जस्त है। बहुत प्रभावि लीखते हैं आप।
अगले पोस्ट का ईंतजार कर रहा हूं..
आपका लेख मैने पहले पढ लीया था पर अपनी बात मै अब केह पा रहा हूं क्यो की उस समय मै मोबाईल से पढ रहा था। और ईंगलीस मे कमेंट देना पडता।
मेरा कमेंट अप्रूव कर देना :)
ReplyDeleteAdarneeya Guruji,
ReplyDeleteSadar abhivadan.Ab ap bhale hee mujhe ankalji kahen lekin man to apko apna guru hee manoonga na.Bhai kal se to mane apko apna guru man hee liya.Bhale hee ap mujhe chela na banaen.(Akhir chela banate to mujhe bhee to sahara ganj le jate kafee pilane.)Chaliye phir kisi din.Man beech beech men apko kasht deta rahoonga.Shubhkamnaon ke sath.
Hemant Kumar